गालियों की गलियों से गुजरने का हुनर

गुजरने का हुनर हे पार्थ, कोई लाख गालियां दे तुझे, तू मस्तराम बनकर जिंदगी गुजारे जा। फिर गालियां खाने से कौन से तेरे शरीर में छिद्र पड़ रहे हैं! जो लोग अच्छे काम करते हैं, उनको ही गालियां मिलती हैं, फिर चाहे वह बुद्ध हो या यीशु। अब तू चुनाव के महारणसंग्राम के मैदान में खड़ा है तो तुझे गालियों के बारे में दो बातें बताता हूं। एक, जो लोग तुझे गालियां देते हैं, यदि तू उसे ग्रहण ही नहीं करेगा तो वे एक 'बैरंग खत' की तरह पुनः भेजने वाले के पास पहुंच जाएंगी। दूसरे, यदि कोई तुझे गालियां दे तो तू उसे फूलों की तरह ही स्वीकार कर रहे पार्थ, तू कहता है कि मुझे गालियों से ऊर्जा मिलती है। यह तेरा गालियों की तरफ एक सकारात्मक ढंग से देखने का ही शुभ परिणाम है। यदि वे लोग तुझे गालियां देने की बजाय अपनी इस ऊर्जा का उपयोग देशहित में करें तो इससे उनका भी भला होगा और देश का भी। लेकिन नादान लोगों को समझाना बहुत मुश्किल काम होता है। तुझे तो मालूम होगा ही कि हमारे देश के कुछ हिस्सों में शादी के दौरान गालियां गाने का चलन है। शादी में समधी लोग गालियां गाकर अपने गिले-शिकवे दूर कर लेते हैं। अब समझ ही गया होगा कि गाली खाने वाला तू अकेला नहीं है ।हे पार्थ, अब तू गाली की महिमा पूरी तरह समझ ही ले। सच तो गाली देने वाला तिरस्कृत नहीं करता वरन गाली के प्रति हृदय में उठी हुई भावना तिरस्कृत करती है। इसलिए जब कोई मनुष्य तुम्हें उत्तेजित करता है तो वह तुम्हारे अंदर की तुम्हारी ही भावना है, जो तुम्हें उत्तेजित करती हैएक बड़ा सत्य और समझ लो कि तुम गाली खा लेना अच्छा मान लेना, बजाय इसके कि कोई तुम्हें सदा-सदा के लिए भुला दे। हे पार्थ, गालियों और आलोचना को तुम एकमात्र प्रतीक मानो। युग-युगांतर से इन प्रतीकों को गढ़ा गया है और समय के साथ उनका रूप बदलता चला आ रहा है। गाली देते ही गाली देने वाले के शरीर में जैसे एक बिजली-सी चमकती है और वह अपने आप को ऊर्जावान महसूस करने लगता है। दूसरी तरफ गाली खाने वाला उसे हजम करके अपनी संयम की ऊर्जा बढ़ाता है। इसलिए तू इस चुनावी रण में संयम की ऊर्जा और अधिक बढ़ा क्योंकि यही तुझे चुनावी रण में अंतिम विजय की मंजिल पर पहुंचाएगी।हे पार्थ, एक अंतिम बात यह कि तू 'ये समूचा विश्व ही मेरा घर है' यह मानकर अपने इस विश्व-घर के एक-एक कमरे रूपी देश पर जो अपने कदम रखकर सबको अपना बनाने के काम में रत है,